WHAT IS ON-PREMISES VS CLOUD SERVICES ??

 AGENDA  ------  हम यंहा कुछ POINTS के आधार पर ON PREMISES VS CLOUD SERVICES को define करेंगे। 

1.  INTRODUCTION 

2.   UNDERSTANDING ON-PREMISES AND CLOUD SERVICES 

3.   DIFFERENCE BETWEEN ON-PREMISES VS CLOUD 

4.   PRO AND CONS 

5.   HYBRID APPROACH 


1.   INTRODUCTION ---- सबसे पहले हम cloud services के बारे मे समझते है। 

CLOUD SERVICES  ----  यदि हमारी कंपनी में कोई server नहीं है जो हमारे clients को services दे सके और हमारी company Cloud Based है तो हमारे सभी clients को services उसी cloud server से मिलेगी जो हमारे कंपनी में तो नहीं लेकिन हम फिर भी हम उस server की services को remotely कही से भी access कर सकते है। और अपने Company के clients को Services दे सकते है। 

1.  INTRODUCTION  ------  Cloud Services समझने के बाद अब हम  ON-PREMISES services को समझेंगे। 

ON-PREMISES SERVICES -----  अब हम ON-PREMISES Services के बारे में समझते है। 

ON-PREMISES SERVICE  ------  ON-PREMISES Services में हमारा local server होता है जो हमारी company के Network Infrastructure में ही होता है।  इस server की help से हम अपने कंपनी के clients को services दे सकते है। और LOCAL Server पर Company के Admin का पूरा control होता है। 


3.  DIFFERENCE BETWEEN ON-PREMISES VS CLOUD SERVICES   -----   इसको हम कुछ points की helps से समझ सकते है। 

ON-PREMISES SERVICES  ---

i.   ON-PREMISES में जो software और application और services run होती है user जो चाहे उन उन application को download कर सकता है और उन services को भी use कर सकता है। 

ii.   ON-PREMISES बहुत पहले से चला आ रहा है और सबसे पहले companies इसी को use करती आ रही है। और cloud हमारी अपने clients को Services देने का new Way है। और ON-PREMISES बहुत पुराना Technology है जिस से clients को services दी जाती है। 

iii.  ON-PREMISES में server हमारी company के अंदर ही होता है और हम अपनी कंपनी के लिए Hardware और Software का licenses Purchase करते है।  क्योकि ये हमारी Business की Property है। 


CLOUD SERVICES  ----

i.   CLOUD  में हमारा CLOUD SERVER कही और होता है और हम उसकी services को remotely कही से भी access कर सकते है। 

ii.  हम cloud services use करने के लिए जितना Pay करते है उसी के हिसाब से हमे services मिलना शुरू होती है। और उन services को हम अपनी company  के clients को दे पाते है। 

iii.  आजकल सभी Companies ON-PREMISES SERVICES को हटा कर CLOUD SERVICES की तरफ move कर रही है। क्योकि ON-PREMISES की services use करने पर हमारा खर्चा बहुत होता है। और CLOUD Services में हमारा इतना ज्यादा खर्चा नहीं होता है। 


4.   PRO AND CONS 

        PRO ------ PRO को हम कुछ points की helps से समझेंगे। 

i .  इसमें scalability बनी रहती है जिसके हिसाब से हम इसमें जो  चाहे changes कर सकते है। 

ii.   आसानी से access कर सकते है कही से भी , किसी भी टाइम और किसी भी device से।

iii.   यंहा हमारी hardware और software cost को reduce कर देता है तो हमारी total cost low हो जाती है।   

iv.   Cloud Vendor बहुत बड़ा Investment करते है Security और Backup Infrastructure को लेकर। यदि हमारा एक cloud server किसी वजह से fail हो जाता है  तो उसके Backup में दूसरा Server तुरंत ready होता है। 

v.    हमेशा यंहा बड़े release की बात होती है यंहा बड़े upgrade scenario को लेकर कोई बात नहीं होती। 

vi.   इसमें online collaboration tools help करता है business efficiency को improve करने में। इसमें हमे security मिल जाती है, reliability मिल जाती है और scalability भी मिल जाती है। और lastly Maintenance बहुत अच्छी तरह मिल जाता है।  

       

CONS ------  CONS को भी हम कुछ points की helps से समझ सकते है। 

i.    सभी Cloud Vendors  उसके user के according उसको services में changes नहीं करते , उनके पास जो services होती है वही services सभी companies और single किसी भी client को देते है। 

ii.   local server में यदि हमारी internet connectivity Proper नहीं मिल रहा तो हमारे Company के Clients  को services नहीं मिल पायेगी। और हमारा company का Business down  हो जायेगा।  

iii.  village area या हमारी company, city से बहार ऐसे जगह पर है जहा internet की connectivity बहुत ही slow है तो वंहा हम cloud modal use नहीं कर पाएंगे। 

iv.   Cloud Service depend करती है उसको देने वाले Vendor पर की वो किस तरह की services दे रहा है। 

v.   आप required होते है आप जब चाहे बड़े release को update कर सकते है और upgrade कर सकते है। 

vi.   यदि हमने एक Vendor से पूरी services ले रखी है और हमे उस Vendor की Services कुछ दिन use करने के बाद पसंद नहीं आती और हम अपने present Vendor को छोड़कर दूसरे Vendor की Services लेना चाहते है तो अपना पूरा डाटा दूसरे Vendor के System पर Migrate करना बहुत मुश्किल होता है। 


5.  HYBRID  APPROACH   -----  इसको हम कुछ points की helps से समझ सकते है। 

i.   बहुत' सारे Business Model और Organization Cloud को prefer करते है तो कई सारे ON-PREMISES को prefer करते है।  ON-PREMISES में एक company के admin का उसके server पर पूरा control होता है इसलिए वो उसमे अपने हिसाब से changes करके अपने clients को services दे सकता है। लेकिन अगर हमारे Infra में Cloud based है और एडमिन को उसमे कुछ changes करना है तो उसके लिए एडमिन को उस Cloud Vendor से एक request डालनी होगी ताकि एडमिन अपने clients को वही services दे सके जिसकी वो request Cloud Vendor से डाल रहा है। 

ii.  Hybrid Solution में कुछ Resources हमारे cloud पर चलेंगे तो कुछ resources हमारे ON-PREMISES पर चलेंगे।  तो user जब चाहे किसी भी resources को अपनी need के अनुसार use कर सकता है। 

iii.   इस तरह से highly customize Approach होता है इसमें हम CLOUD और ON-PREMISES को अपनी service के according use कर सकते है। 


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