ROUTER FULL DESCRIPTION IN HINDI
I. ROUTER DEFINATION -- router का काम होता है data packet को route करना इसकी हेल्प से हमारा डाटा packet form मे source से destination तक पूरी security के साथ जाता है। router हमारे डाटा को जब source से लेकर चलता है तो वो check करता है कि उसके neighbor router पर कितना traffic है और वो कितनी speed से डाटा को destination तक पहुंचा सकता है यदि वो router इसको suitable लगता है तो ये हमारा router अपनी information share करता है। अगर suitable नहीं लगे तो हमारा router किसी ओर router से अपना डाटा शेयर करता हुआ data को destination तक पहुंचाता है।
ROUTER PORTS DESCRIPTION --
1. FAST ETHERNET PORT -- इस पोर्ट का use router से switch को connect करके एक internet segment को multiple devices के लिए multiple internet segments मे बदला जाता है। जिस से हम एक internet को multiple device मे use कर पाते है। हम इस पोर्ट से direct pc या server को भी connect कर सकते है।
2. SERIAL PORT -- router के इस पोर्ट से हम एक router को दूसरे router से connect करने के लिए करते है।
3. AUXILIARY PORT -- auxiliary पोर्ट का use router से modem को connect करने के लिए करते है। और router की हेल्प से modem पर connected devices के डाटा को secure करने के लिए करते है।
4. CONSOL PORT -- कंसोल पोर्ट का use router को configure करने के लिए होता है router को configure करने के लिए हम एक PUTTY SOFTWARE का use करते है।
5. POWER ON/OFF BUTTON -- router की पावर को start और stop करने के लिए करते है।
MAIN FEATURE --
1. RAM(RANDOM ACCESS MEMORY) --- RAM को router की भाषा मे running-config बोलते है।जब हम router पर कोई भी configuration करते है तो ये temporary time के लिए data को store करके रखता है। और जैसे ही हम router को on/off करते है तो हमारा temporary data delete हो जाता है।
2. NV-RAM(NONVOLATILE MEMORY) --- NVRAM हमारे डाटा को temporary नहीं permanent store करके रखता है जो हमारे router के on/off करने पर भी डिलीट नहीं होता। NVRAM को हम router की भाषा मे startup-config से पहचानते है।
3. MINI IOS (INTERNETWORK OPERATING SYSTEM) --- ये router का operating system होता है इस ऑपरेटिंग सिस्टम पर ही register की कमांड रन होती है इसके डिलीट होने पर हमारा router rommon mod पर आ जाता है।
4. ROM(READ ONLY MEMORY) --- ROM को हम BOOTING + POST(POWER ON SELF TEST) से समझ सकते है ROM का काम होता है ROUTER को power मिलते के साथ ही booting process को enable करना और post के अंतर्गत सभी hardware devices को test करना और उनको enable करना।
5. REGISTER --- router के configuration मे only वही कमांड execute होती है जो कमांड register मे awailable होती है। register से बहार की command यहाँ execute नहीं होती।
2620*m cisco router |
ROUTER PORTS DESCRIPTION --
1. FAST ETHERNET PORT -- इस पोर्ट का use router से switch को connect करके एक internet segment को multiple devices के लिए multiple internet segments मे बदला जाता है। जिस से हम एक internet को multiple device मे use कर पाते है। हम इस पोर्ट से direct pc या server को भी connect कर सकते है।
2. SERIAL PORT -- router के इस पोर्ट से हम एक router को दूसरे router से connect करने के लिए करते है।
3. AUXILIARY PORT -- auxiliary पोर्ट का use router से modem को connect करने के लिए करते है। और router की हेल्प से modem पर connected devices के डाटा को secure करने के लिए करते है।
4. CONSOL PORT -- कंसोल पोर्ट का use router को configure करने के लिए होता है router को configure करने के लिए हम एक PUTTY SOFTWARE का use करते है।
5. POWER ON/OFF BUTTON -- router की पावर को start और stop करने के लिए करते है।
MAIN FEATURE --
1. RAM(RANDOM ACCESS MEMORY) --- RAM को router की भाषा मे running-config बोलते है।जब हम router पर कोई भी configuration करते है तो ये temporary time के लिए data को store करके रखता है। और जैसे ही हम router को on/off करते है तो हमारा temporary data delete हो जाता है।
2. NV-RAM(NONVOLATILE MEMORY) --- NVRAM हमारे डाटा को temporary नहीं permanent store करके रखता है जो हमारे router के on/off करने पर भी डिलीट नहीं होता। NVRAM को हम router की भाषा मे startup-config से पहचानते है।
3. MINI IOS (INTERNETWORK OPERATING SYSTEM) --- ये router का operating system होता है इस ऑपरेटिंग सिस्टम पर ही register की कमांड रन होती है इसके डिलीट होने पर हमारा router rommon mod पर आ जाता है।
4. ROM(READ ONLY MEMORY) --- ROM को हम BOOTING + POST(POWER ON SELF TEST) से समझ सकते है ROM का काम होता है ROUTER को power मिलते के साथ ही booting process को enable करना और post के अंतर्गत सभी hardware devices को test करना और उनको enable करना।
5. REGISTER --- router के configuration मे only वही कमांड execute होती है जो कमांड register मे awailable होती है। register से बहार की command यहाँ execute नहीं होती।
Types of Router -- ROUTER को हम 3 category में divide कर सकते है --
1. Organization Router
2. Internet Edge Router
3. Service Provider Router
1. Branch Router --- ये router small organization में use किया जाता है। जैसे - हमारे दो city में अलग-अलग branch चल रही है और दोनों ही city की ब्रांच में हमारी end device router लगा होता है। तो दोनों branch को हम frame-relay का use करके connect कर सकते है। हमारी small organization के लिए जो router की series होती है वो इस तरह होती है।
800 series ,1800 series, 1900 series router, 2800 series router , 2900 series router आते है।
2. Internet Edge Router --- ये router ISP के द्वारा use किया जाता है हम जो घर पर Broadband use करते है उस पर ISP बहुत सी policy apply कर देता है ताकि हम limited way में ISP की internet की services को use कर सके है। इसमें 1000 series router ,7200 series router , 7300 series router आते है। और ये AGGREGATE SERVICE ROUTER होते है मतलब ये specific service provide करने के लिए किया जाता है।
3. SERVICE PROVIDER ROUTER --- ये एक WAN ROUTER होते है और ये GLOBAL ISP को use करते है। मतलब इसका use पुरे के पुरे planet को connect करने के लिये किया जाता है। ये router बहुत ही fast तरीके से transmission करता है। और बहुत ही high security provide करता है। इस series में जो router आते है वो ये है 900 series router ,1000 series router ,7200 series router, 7300 series router और 7500 series router आते है।
ROUTER SECURITY --- हम router पर अलग अलग तरह की security लगा सकते है। इस security की help से ही हम अपने डाटा को secure कर सकते है
1. Normal Password Security (Level 7 )
2. Md5 Password Security
3. Router Port Security
1. Normal Password Security --- हम router पर normal password लगा कर secure कर सकते है लेकिन ये normal password level 7 type के password होते है। और router के privilege mod पर जाकर इस password को कोई भी देख सकता है। इसलिए ये इतना ज्यादा secure नहीं होता।
2. Md5 Password --- जब normal password का कोई भी पता लगाने लगा तब router पर कोई security नहीं रही इसलिए कंपनी राऊटर को बहुत ज्यादा secure करने के लिए Md5 password को use करने लगी। और इसका encryption form को break करना बहुत hard होता है। इसलिए Md5 को use करने से router बहुत ज्यादा secure हो गया।
3. Router Port Security --- हम router के अलग अलग port पर Password लगा कर उसके port को secure कर सकते है।
- Consol Port Password Security
- Fast Ethernet Password Security
- Serial Port Password Security
- AUX Port Password Security
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