WHAT IS VLAN AND HOW MANY TYPES OF VLAN IN HINDI(PART 1) ??
I. VLAN --- VLAN की full form VIRTUAL LOCAL AREA NETWORK है। VLAN की जरुरत हमे क्यों पड़ती है इसको हम समझते है। यदि हमारी company में कुछ department है जैसे - Human resourse (H.R.) Department और Marketing department (M.R.) और इन दोनों Department को हमे switch पर configure करना है तो हमे अपने switch को virtually divide करके दो department configure कर सकते है।
II. VLAN information --- VLAN का database vlan.dat नाम की file में stored होता है। और ये file switch की flash memory में stored होती है।
Types of VLAN --
1. Data or User VLAN
2. Voice VLAN
3. Management VLAN
4. Native VLAN
5. Default VLAN
1. Data or User VLAN --- इस VLAN का use data को store करना ,email को manage , shared application के traffic को control करना। इसके लिए हम switch को virtually divide करके काम करते है। और उस पर अलग अलग department बना देते है।
2. Voice VLAN ---- Voice VLAN में हम अपने local area network में ip phone को use करते है। यदि हमारे switch पर दो virtually department है जिसका नाम H.R. और M.R. है। और दोनों Department के लिए हमने एक-एक IP PHONE का use किया है। जिसमे H.R. वाला Department अपने Department के लोगो से ही कम्यूनिकेट कर सकता है। वो इस IP PHONE का use M.R. Department के लोगो से बात करने के लिए नहीं कर सकता। इसी तरह M.R. Department वाला उस IP PHONE का use अपने ही department के लोगो से बात करने के लिए use कर सकता है H.R. Department से नहीं।
3. Management VLAN --- Management VLAN में हम switch को अलग अलग department में virtually divide करने के बाद IP के management का भी पूरा ध्यान रखते है। इस VLAN में हमारे यदि दो डिपार्टमेंट में अलग अलग server लगे है और दोनों department में हमने telnet/ssh apply किया है। तो उस ssh/telnet की help से हम अपने Department के server को remotely access कर सकते है। हर department केवल अपने server को ही access कर सकता है। जो उसके लिए VLAN में register किया गया है।
4. Native VLAN ---- यदि हमारा कोई पुराना कंपनी का Network चल रहा है तो हम वह भी SWITCH पर VLAN बनाकर काम कर सकते है। यदि हमारे कंपनी में एक switch पर 24 port पूरी तरह से फुल हो जाते है। तब हम cross cable से connect करते हुये एक दूसरा switch लेते है और उसको पहले switch से trunk करते हुये connect कर लेते है और उस पर भी पहले switch की तरह VLAN बनाकर काम करते है। दोनों switch पर सभी department केवल अपने department से ही communicate करेंगे। किसी दूसरे department से नहीं।
5. Default VLAN --- Default VLAN हमारा पहले ही 24 port पर activate रहता है। और ये VLAN 1 पर activate रहता है। और इस पर हमारी दो protocol work करती है। पहली protocol का नाम है------- CDP(CISCO DISCOVERY PROTOCOL ) और दूसरी STP (SPANNING TREE PROTOCOL ) . Default VLAN पर हम अलग अलग Department बनाकर काम कर सकते है।
VLAN को दो तरह से configure किया जा सकता है --
A. STATIC VLAN
B. DYNAMIC VLAN
A. STATIC VLAN ---- STATIC VLAN में हमे manual configuration करनी पड़ती है। इसमें हम अलग अलग department के लिए जितने भी VLAN बनाते है। उन सभी की information हमे switch को देनी होती है। कि हमारा switch इस VLAN interface को access करे।
B. DYNAMIC VLAN ---- यदि हमारे एक switch पर virtual VLAN configure है और दूसरे switch पर भी same VLAN configure है तो ये अपने data को उस दूसरे switch के साथ same department में डाटा communicate करवा देता है।
VLAN में हम क्या क्या configure कर सकते है।
A. TRUNKING PORT
B . INTERVLAN
A. TRUNKING ---- जब हम एक switch को दूसरे switch के साथ same vlan की configuration करते हुये cross media cable की help से connect करते हुये trunk करते है। तो इस process को TRUNKING करना कहते है। trunk करने से दोनों switch अपने same department के साथ communicate करने लगते है।
B. INTERVLAN --- यदि हमे कभी कभी different department को आपस में communication करवाने की जरूरत हो जाती है। जब अलग अलग department जिनका ip address different होता है और वो आपस में communicate करती है। तो इस process को INTERVLAN कहते है। INTERVLAN के इस process में हमे एक router की need होती है। जो different department को आपस में communicate करवा सके।
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